उड़न तशतरी से कुछ अजीब से लोग निकले ! कहानी

उड़न तशतरी से कुछ अजीब से लोग निकले ! कहानी




शिल्पी रस्तोगी
एक थी रिया नीली आंखों वाली बार्बीडाल जैसी प्यारी और दिल की बेहद नेक लड़की। घर में सबकी लाड़ली और स्कूल में एक होनहार छात्रा के रूप में साथियों और टीर्चस की प्यारी, सदैव सबकी मदद करने को तैयार उसके यहीं गुण उसे खास बना देते थे। रिया पांचवी कक्षा में पढ़ती थी इसके साथ ही सांइस की होने वाली प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का उसे बेहद शौक था। हर प्रतियोगिता में नए नए छोटे छोटे आविष्कारों के लिए उसे कई बार प्रथम पुस्कार मिल चुके थे। बचपन से ही रिया को अंतरिक्ष से जुड़ी बाते जानने और सुनने में खासी दिलचस्पी थी। छोटी थी तो अक्सर रात को तारे देखते हुए आसमान में जैसे कुछ ढूढने का प्रयास करती थी। अपने पापा से आकाश गंगा और प्लानेट के बारे में कहानियां सुना करती। जैसे जैसे रिया बड़ी हुई वैसे वैसे अंतरिक्ष के बारे में जानने की चाहत के साथ वहां जाने का सपना भी उसकी आंखों में पलने लगा था। अब उसके पास इन ग्रहों और अंतरिक्ष की दुनिया से जुड़ी इतनी किताबे थी कि उसने अपने घर में एक छोटी सी लायब्रेरी ही बना डाली। इसके अलावा रिया कि एक और विशेषता भी थी,वह अन्य बच्चों की तरह इधर उधर अपना टाइम खराब करने के स्थान पर अपनी बनाई एक छोटी सी प्रयोगशाला में भी लगी रहती उसका सपना था कि वह अपनी बनाई सैटेलाइट से ही एक दिन अंतरिक्ष की उड़ान भरेगी। रोज रात को अपने टैलिस्कोप से वह नित नया कुछ तलाशने में लगी रहती। एक रात को रिया अपनी छत पर बैठी अपनी खोज में लगी थी कि उसे आसमान में कुछ चमकीली सी चीज नजर आई। धीरे धीरे वह चमकती चीज उसके करीब आने लगी अब तो रिया को भी डर लगने लगा लेकिन यह क्या वह तो अब एकदम रिया से थोड़ी ही दूर थी। जिसे रिया अब स्पष्ट रूप से देख पा रही थी,यह तो कोई उड़न तशतरी है तभी उसमे से कुछ अजीब से लोग निकले। उन्हे देखकर उसे फिल्म कोई मिल गया का जादू याद आ गया। ओह यह तो एलियन हैं उसने अपने आप से कहा, तभी वह दोनो उसके बिल्कुल पास आ गए रिया उनसे डर नहीं रही थी क्योंकि रिया को उनसे बात करने का माध्यम अच्छी तरह पता था।,